श्री बालाजी धाम

श्री बालाजी धाम, रबाहर कालोनी, नंदपुरा झांसी शहर , उत्तर प्रदेश का एक प्राचीन स्थान है| भक्तों का प्रमुख स्थान है। लोग यहाँ आकर बालाजी महाराज ,काल भैरव और अन्य देवता की पूजा अर्चना करते हैं और शांति और सुख का आशीर्वाद लेते हैं। इस मंदिर की सुंदरता और धारोहर बहुत प्रभावशाली हैं।

झांसी के श्री बालाजी धाम में भक्ति और आनंद का अनुभव होता है।  यहाँ पर हनुमानजी का विशेष मंदिर है जो भक्तों को आशीर्वाद और शांति प्रदान करता है।

 यहाँ भक्तिभाव से भरपूर वातावरण है और लोग यहाँ श्रद्धा और भक्ति का अनुभव करते हैं।

प्रश्न-उत्तर फ़ॉर्म
अपने मन में आने वाले सभी प्रकार के प्रश्न पूछिए और श्री भगवान की ओर एवं अध्यात्म की ओर अपना कदम बढ़ाइए।
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श्री बालाजी महाराज दरबार के नियम व विधि

1. दरखास्त क्यों लगती है?

श्री बालाजी महाराज के दरबार में दरखास्त लगाना एक विशेष परंपरा है, जो भक्तों के मन की इच्छाओं और समस्याओं के समाधान के लिए की जाती है। दरखास्त लगाने का मुख्य उद्देश्य श्री बालाजी महाराज की कृपा प्राप्त करना है, ताकि उनके आशीर्वाद से सभी कार्य सफल हो सकें।

दरखास्त में 6 बताशे, 6 लड्डू और थोड़ा सा घी होता है, जो श्री बालाजी, भैरव जी, और प्रेतराज जी को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। इस भोग को अर्पित करने के बाद, दो लड्डू भक्त को मिलते हैं। इन लड्डू को खाने से दरखास्त की स्वीकृति मानी जाती है और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

2. एक कार्य हेतु एक ही दरखास्त

दरखास्त लगाने का नियम यह है कि एक कार्य के लिए केवल एक बार दरखास्त लगाई जाती है, जिसमें उपर्युक्त सामग्री होती है। यदि कोई भक्त एक ही कार्य को लेकर बार-बार दरखास्त लगाए, तो यह ठीक नहीं माना जाता है। यह परंपरा इसलिए है ताकि भक्त का विश्वास और श्रद्धा मजबूत रहे, और वह किसी भी कार्य में केवल एक बार पूरी निष्ठा और विश्वास के साथ दरखास्त लगाए।

 

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3. अर्जी लगाने का विधान और सामग्री

अर्जी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत भक्त अपनी विशेष इच्छाओं या समस्याओं का समाधान मांगते हैं। यह व्यक्तिगत या पारिवारिक हो सकती है, और इसमें अर्जी लगाने वाले के परिवार के सभी सदस्य भी सम्मिलित हो सकते हैं। अर्जी लगाने के दिन यह रखना आवश्यक है कि पूरा परिवार खाली पेट दरबार पहुंचे, ताकि उनका मन पर्ण रूप से शब्द और ध्यानमग्न हो। किसी भी प्रकार का नाश्ता, चाय या अन्य खाद्य पदार्थ अर्जी लगाने से पहले नहीं लिया जाता है, क्योंकि यह भक्त की आस्था और परिश्रम को प्रभावित कर सकता है। खाली पेट होने से भक्त का मन संकल्प और प्रार्थना में पूरी तरह समर्पित रहता है, जिससे अर्जी जल्दी स्वीकार होती है।

 विशेष ध्यान देने योग्य बातें श्रद्धा और विश्वासः दरखास्त और अर्जी दोनों में श्रद्धा और विश्वास का बहुत महत्व है। केवल शारीरिक रूप से प्रक्रियाओं को पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आंतरिक श्रद्धा और विश्वास की आवश्यकता है। 3/4 • समय और स्थानः अर्जी और दरखास्त के सम और स्थान का भी ध्यान रखना जरूरी है। इन्हें उसी स्थान पर और उचित समय पर ही किया जाता है, जब श्री बालाजी महाराज का माहौल और वातावरण भक्तों के लिए शुभ हो।

पूज्य महाराज जी