पूज्य महाराज जी

प्रथम सेवक मम्मी जी व पापाजी के निधन के बाद उनके तीसरे पुत्र श्री रोहित राजपूत जी को बाबा की सेवा का अवसर प्राप्त हुआ जिसके पश्चात बाबा के निर्देशानुसार गद्‌दी पर बैठा के बाबा का सेवादार नियुक्त किया गया। जिन्हें सम्पूर्ण मन्दिर मे भईया जी व गुरुजी के नाम से जाना जाता है। लोगो को ऐसा आस्था है कि अगर वो अपने मन की बात या कोई भी परेशानी भईया जी से कहेगे तो वह सीधे बाबा तक जायेगी और यदि जल भभूति भईया जी के हाथो से प्रदान की जाये तो ज्यादा लाभप्रद प्रदान करेगी। लोगों की ऐसी मान्यता भी है कि भईया जी बाबा के अत्यधिक करीब है इसलिये उनके झाड़ा झार लगाते ही मरीज तुरन्त आराम पा जाता है और अपनी परेशानी का समाधान पति है। 

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दरबार के नियम और अनुशासन

दरबार में प्रवेश करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण नियमों और अनुशासन का पालन करना आवश्यक है। यह नियम न केवल आपकी धार्मिक यात्रा को समृद्ध बनाते हैं, बल्कि परिसर में शांति और सम्मान बनाए रखने में भी मदद करते हैं। हाजरी की दरखास्तः

  • दरबार में प्रवेश से पहले आपको हाजरी की दरखास्त लगानी चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जो यह सुनिश्चित करती है कि सभी भक्तों का नाम रजिस्टर में दर्ज किया जाए और कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के अंदर न जाए।

साफ-सफाई का ध्यान रखें: दरबार में प्रवेश करते समय परिसर की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। परिसर में बिखरी हुई चीजें या गंदगी से बचें, क्योंकि यह न केवल धार्मिक स्थान की पवित्रता को प्रभावित करता है, बल्कि भक्तों की मानसिक शांति को भी असंतुलित कर सकता है।

देवी-देवताओं के विग्रह और पूजा विधिः दरबार में स्थापित देवी-देवताओं के विग्रहों को न छुएं और न ही उनकी पूजा सामग्री को अनधिकृत रूप से छेड़े। यदि आप भोग या प्रसाद चढ़ाना चाहते हैं, तो इसे ध्यान से और मंदिर के निर्धारित नियमों के अनुसार करें। देवी-देवताओं के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए, क्योंकि यह पवित्रता और भक्ति के आदर्शों का पालन करने का प्रतीक है।

भक्ति और पूजाः दरबार में प्रवेश करने के बाद, भक्ति भाव से स्तुति, भजन और पूजन करें। इन धार्मिक क्रियाओं से आपका आत्मिक विकास होता है और आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 

  • स्वास्थ्य संबंधित नियमः यदि आप मन्दिर में रुकने का निर्णय लेते हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि आपके साथ कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या से ग्रसित व्यक्ति हो, तो उसके साथ कोई 2/4 देखभाल करने वाला व्यक्ति अवश्य हो। विशेष रूप से मानसिक रोग, मिर्गी या मूर्छा जैसी समस्याओं से ग्रसित व्यक्ति के साथ सतर्कता बनाए रखना बेहद आवश्यक है, ताकि वह स्वयं या अन्य को किसी प्रकार की हानि न पहुँचा सके। इन नियमों का पालन करना आपके धार्मिक अनुभव को और भी उत्तम और सुरक्षित बनाता है। इनका उद्देश्य केवल पवित्रता, सम्मान और शांति बनाए रखना है, ताकि सभी भक्त एक साकारात्मक और समृद्ध अनुभव प्राप्त कर सकें।